
बुलेट पर हर दिन पहाड़ जीतने वाली सृष्टि की कहानी, जिसने पूरे उत्तराखंड को सोचने पर मजबूर कर दिया।
हिम उत्तराखंड न्यूज संपादक
श्रीनगर से रिगोली तक का सफर आसान नहीं है। घुमावदार पहाड़ी सड़कें, घने जंगल और सुनसान रास्ते… लेकिन इन्हीं रास्तों पर हर रोज़ एक बुलेट की आवाज़ गूंजती थी। उस बुलेट पर सवार होती थीं सरकारी शिक्षिका सृष्टि कंडारी।
पहाड़ में बुलेट चलाने वाली बेटियां आज भी कम देखने को मिलती हैं। सृष्टि सिर्फ एक अध्यापिका नहीं थीं, बल्कि आत्मविश्वास, साहस और समर्पण की मिसाल मानी जाती थीं। बच्चों को पढ़ाना उनका जुनून था। वे रोज़ कठिन रास्ता तय कर विद्यालय पहुंचतीं और पूरे मन से विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने में जुट जातीं।
जिन रास्तों पर लोग जंगली जानवरों के डर से जाने से कतराते हैं, वहां सृष्टि अकेले बुलेट से सफर करती थीं। उन्हें जानने वाले बताते हैं कि चुनौतियों से पीछे हटना उनकी आदत नहीं थी।
लेकिन आज वही सृष्टि हमारे बीच नहीं हैं। उनकी संदिग्ध मौत ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर दिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और सभी पहलुओं को खंगाला जा रहा है।
सृष्टि के परिजनों ने उनके पति, जो सचिवालय में निजी सचिव के पद पर कार्यरत हैं, तथा ससुराल पक्ष के अन्य लोगों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और दहेज मृत्यु सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। वहीं, मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है और जांच के निष्कर्ष आने बाकी हैं।
सृष्टि के भाई का कहना है कि उनकी बहन साहसी और आत्मविश्वासी थीं, जिन्होंने जीवन की हर चुनौती का डटकर सामना किया। परिवार अब केवल एक मांग कर रहा है—निष्पक्ष जांच हो और यदि कोई दोषी है तो उसे कानून के अनुसार सज़ा मिले।
आज सृष्टि की बुलेट तो खामोश है, लेकिन उनका साहस, शिक्षा के प्रति समर्पण और संघर्ष की कहानी लंबे समय तक याद रखी जाएगी। अब पूरे उत्तराखंड की नज़र जांच पर है और सभी यही उम्मीद कर रहे हैं कि इस मामले की सच्चाई जल्द सामने आए और न्याय सुनिश्चित हो।



