
एक मासूम की चीखें आखिर किसने नहीं सुनीं?
हिम उत्तराखंड न्यूज संपादक
बताया जाता है कि एक फोन कॉल के बहाने केतन को घर से बुलाया गया। वह अपने मित्र के साथ निकला, लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया।
परिजनों और स्थानीय लोगों के अनुसार, केतन के साथ अत्यंत क्रूर और अमानवीय व्यवहार किया गया। उसके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए, जिन्हें देखकर हर संवेदनशील व्यक्ति का दिल दहल उठता है। आज भी परिवार की आंखों के सामने अपने बेटे की अंतिम पीड़ा का दृश्य घूम रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर एक बच्चे के साथ इतनी बेरहमी कैसे की जा सकती है? उस पिता पर क्या बीती होगी जिसने अपने बेटे को असहनीय दर्द में तड़पते देखा? उस मां के आंसुओं का हिसाब कौन देगा, जिसके सपने उसके बेटे के साथ ही टूट गए?
यदि जांच में सामने आए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल एक अपराध नहीं बल्कि मानवता को शर्मसार करने वाली घटना है। कानून से ऊपर कोई नहीं है और दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे कठोरतम कानूनी दंड मिलना चाहिए।
आज पूरा क्षेत्र एक ही आवाज उठा रहा है—
केतन को न्याय दो। सत्य को सामने लाओ। दोषियों को कानून के अनुसार कठोर सजा दो।
एक परिवार का बेटा चला गया है, लेकिन न्याय की लड़ाई अभी बाकी है।
🕯️ न्याय के लिए आवाज उठाइए। 🕯️ केतन को न्याय मिलना ही चाहिए।



