
गैरसैंण बजट सत्र का दूसरा दिन, सदन में विपक्ष का हंगामा
विधेयकों पर हो रही चर्चा,हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही स्थगित
एक बार फिर से सदन की कार्यवाही शुरू
हिम उत्तराखंड ब्यूरो
गैरसैंण। गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में चल रहे उत्तराखंड के बजट सत्र 2026 की कार्यवाही का आज मंगलवार 10 मार्च को दूसरा दिन रहा। सोमवार को पहले दिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 111,703.21 करोड़ रुपये का बजट पेश किया था पिछले बजट की तुलना में इस बार के बजट में 10.41 प्रतिशत की वृद्धि की गई है मंगलवार को दूसरे दिन की शुरुआत प्रश्नकाल से हुई आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट और कैग की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी गई इसके साथ ही 11 अध्यादेश भी सदन के पटल पर रखे गए। कांग्रेस विधायक हरीश धामी के वेल में पहुंचने के बाद हंगामा हो गया था कुछ देर सदन स्थगित होने के बाद कार्यवाही फिर से शुरू हो गई है।
गैरसैंण विधानसभा बजट सत्र में उस समय हंगामा हो गया जब कांग्रेस विधायक हरीश धामी वेल में पहुंच गए। उन्होंने धारचूला की ब्लॉक प्रमुख का मामला उठाया। धामी ने आरोप लगाया कि नेपाली मूल की महिला को गलत प्रमाण पत्र पर ब्लॉक प्रमुख बनाया गया है इस पर विपक्षी विधायकों और स्पीकर के बीच तीखी बहस हो गई देखते ही देखते सदन में विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। स्पीकर ने सदन चलने देने की अपील की धारचूला विधायक हरीश धामी ने व्यवस्था के प्रश्न के तहत उठाया था मुद्दा उन्होंने अधिकारियों पर लगाया मनमानी करने का आरोप. हंगामा इतना बढ़ा कि सदन को कुछ देर के लिए स्थगित कर दिया गया है।
सदन में 11 विधेयक हुए पेश
बजट सत्र के दूसरे दिन आज मंगलवार को 11 विधेयक सदन में पेश किए गए. कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए देवभूमि परिवार विधेयक पेश किया गया। देवभूमि परिवार आईडी में मुखिया के तौर पर परिवार की वरिष्ठतम महिला सदस्य का नाम होगा. कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और लाभार्थियों तक पारदर्शी तरीके से सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने मंगलवार को ‘देवभूमि परिवार विधेयक- 2026’ सदन पटल पर रख दिया है. इस विधेयक के कानून बन जाने पर प्रदेश में एकीकृत और सत्यापित परिवार-आधारित डेटाबेस ‘देवभूमि परिवार’ की स्थापना हो सकेगी। विधेयक का उद्देश्य विभिन्न विभागों में बिखरे लाभार्थी डेटा को एक मंच पर लाकर योजनाओं के संचालन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समन्वित बनाना है. देवभूमि परिवार आईडी में मुखिया के तौर पर परिवार की 18 वर्ष से अधिक आयु की वरिष्ठतम महिला सदस्य का नाम दर्ज होगा।
वर्तमान में राज्य के अलग-अलग विभाग अपनी-अपनी योजनाओं के लिए अलग लाभार्थी डेटाबेस का उपयोग करते हैं. इसके कारण कई बार लाभार्थी आंकड़ों का दोहराव, पुनः सत्यापन की जटिल प्रक्रियाएं और विभागों के बीच समन्वय की कमी जैसी समस्याएं सामने आती हैं. इससे न केवल प्रशासनिक संसाधनों पर अतिरिक्त भार पड़ता है, बल्कि योजनाओं के आकलन और प्रभावी क्रियान्वयन में भी बाधाएं उत्पन्न होती हैं.
अब इस विधेयक के माध्यम से राज्य में एक एकीकृत परिवार-स्तरीय डेटा भंडार स्थापित किया जाएगा, जो विभिन्न विभागों और एजेंसियों के लिए लाभार्थी संबंधी सूचनाओं का एक विश्वसनीय स्रोत के रूप में कार्य करेगा. इससे योजनाओं का बेहतर लक्ष्योन्मुखी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकेगा और जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी सहायता अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगी।
इसके साथ ही, इस डेटा प्रणाली के प्रभावी प्रबंधन, संरक्षण और संरचनात्मक सुधारों के लिए एक उपयुक्त संस्थागत तंत्र का भी गठन किया जाएगा. प्रस्तावित व्यवस्था के अंतर्गत विभागों के बीच सुरक्षित और विनियमित डेटा आदान-प्रदान की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी, जिससे योजनाओं के बेहतर लक्षित वितरण और समन्वय को मजबूती मिलेगी. यह पूरी व्यवस्था डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 (DPDP Act 2023) के प्रावधानों के अनुरूप संचालित की जाएगी, ताकि नागरिकों के डेटा का उपयोग सहमति, पारदर्शिता और सुरक्षा के साथ सुनिश्चित किया जा सके। सीएम धामी ने कहा कि ‘देवभूमि परिवार विधेयक- 2026’ सुशासन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और उत्तराखंड के नागरिकों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा।



