
पहाड़ में आवारा पशुओं का लगातार आतंक!
हिम उत्तराखंड न्यूज ब्यूरो
महिलाओं ने गाय संग निकाला पैदल मार्च, प्रशासन को दी सीधी चेतावनी
कुलसारी से थराली तहसील तक अनोखा प्रदर्शन, खेत उजड़ने से गुस्से में ग्रामीण
थराली/चमोली। पहाड़ों में तेजी से बढ़ रही आवारा पशुओं की समस्या अब विकराल रूप ले चुकी है। मंगलवार को थराली क्षेत्र में एक ऐसा अनोखा और जोरदार विरोध प्रदर्शन देखने को मिला, जिसने प्रशासन को भी झकझोर कर रख दिया। कुलसारी, बसर और आसपास के गांवों की दर्जनों महिलाएं एक गाय को साथ लेकर कुलसारी से पैदल मार्च करते हुए थराली तहसील परिसर पहुंचीं और जमकर प्रदर्शन किया।महिलाओं का यह विरोध सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि उस पीड़ा का प्रतीक था जो वे लंबे समय से झेल रही हैं। हाथों में नारों के साथ महिलाएं साफ कह रही थीं कि अब उनकी सहनशक्ति जवाब दे चुकी है।
ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि पहाड़ों में अब लोग पशुपालन से दूरी बनाने लगे हैं। दूध निकालने और खेती में उपयोग के बाद लोग अपने ही पालतू पशुओं—गाय और बैलों—को सड़कों पर छोड़ देते हैं। यही पशु अब आवारा होकर बाजारों और गांवों में आतंक मचा रहे हैं।इन आवारा पशुओं का झुंड रातों-रात खेतों में घुसकर महीनों की मेहनत को चट कर जाता है। लहलहाती फसलें बर्बाद हो रही हैं और किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
महिलाओं ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने इस समस्या को सुलझाने की कोशिश की हो। इससे पहले भी गांव की महिलाओं ने आपस में चंदा इकट्ठा कर आवारा पशुओं को पकड़कर गौशालाओं और गौ-आश्रमों तक पहुंचाया था।लेकिन इसके बावजूद लोग लगातार अपने पशुओं को कुलसारी और आसपास के इलाकों में छोड़ रहे हैं, जिससे समस्या और गंभीर होती जा रही है।इस बार महिलाओं ने एक अलग ही तरीका अपनाया। उन्होंने एक छोड़ी गई गाय को साथ लिया और उसे लेकर कुलसारी से थराली तहसील तक पैदल मार्च किया। यह दृश्य हर किसी के लिए चौंकाने वाला था और देखते ही देखते यह प्रदर्शन पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया।
तहसील परिसर पहुंचकर महिलाओं ने उपजिलाधिकारी पंकज भट्ट को अपनी समस्या विस्तार से बताई और तत्काल समाधान की मांग की।उपजिलाधिकारी ने गंभीरता दिखाते हुए मौके पर ही उस गाय को गौ-सदन भिजवाया और ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि अब इस समस्या पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।उन्होंने स्पष्ट कहा कि पशुपालन विभाग की मदद से ऐसे लोगों पर नजर रखी जाएगी जो पशुओं का दोहन करने के बाद उन्हें सड़कों पर छोड़ देते हैं। यदि कोई दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी
पहाड़ों के गांवों में आवारा पशुओं का आतंक दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। न सिर्फ खेती चौपट हो रही है, बल्कि बाजारों में भी इन पशुओं से दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले समय में यह बड़ा आंदोलन बन सकता है।



