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मार्च में ही अप्रैल जैसी तपिश, समय से पहले आम की बौर और बुरांश ने बढ़ाई चिंता

मार्च में ही अप्रैल जैसी तपिश, समय से पहले आम की बौर और बुरांश ने बढ़ाई चिंता

बदले मौसम ने बढ़ाई पहाड़ की चिंता: मार्च में ही तपिश, सूखने लगे जलस्रोत और समय से पहले आम-बुरांश की बहार

(हिम उत्तराखंड न्यूज ब्यूरो)

गौचर। मौसम के बदले मिजाज ने पहाड़ की फिजा को समय से पहले ही तपिश से भर दिया है। लंबे समय से बारिश न होने के कारण मार्च माह में ही अप्रैल जैसी गर्मी का अहसास होने लगा है। इसका असर प्रकृति और कृषि दोनों पर साफ दिखाई देने लगा है। जहां एक ओर ऊंचाई वाले इलाकों में खिलने वाला बुरांश समय से पहले लालिमा बिखेरने लगा है, वहीं निचले क्षेत्रों में आम के पेड़ों पर समय से पहले बौर आ जाने से ग्रामीणों और किसानों की चिंता बढ़ गई है। मौसम के इस असामान्य बदलाव का प्रभाव जल स्रोतों, खेती-बाड़ी और वन संपदा पर भी साफ नजर आने लगा है। यदि जल्द ही मौसम ने करवट नहीं ली तो आने वाले दिनों में क्षेत्र को पेयजल संकट, फसलों की क्षति और जंगलों में आग जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

पहाड़ों में सामान्य तौर पर नवंबर माह से ही शीतकालीन मौसम की शुरुआत हो जाती थी।

इस दौरान बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी का सिलसिला शुरू हो जाता था जो फरवरी माह तक जारी रहता था। इससे ऊंची चोटियां और पहाड़ियां बर्फ की सफेद चादर से ढक जाती थीं और वातावरण में ठंडक बनी रहती थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से मौसम के इस पारंपरिक चक्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इस वर्ष भी सर्दियों के मौसम में अपेक्षित बारिश और बर्फबारी नहीं होने से पहाड़ों का स्वरूप ही बदल गया है। मार्च का महीना शुरू होते ही तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोगों को अप्रैल माह जैसी गर्मी का अहसास होने लगा है। मौसम के इस बदलाव का असर वनस्पतियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है।

ऊंचाई वाले इलाकों में अप्रैल के अंतिम सप्ताह में खिलने वाला बुरांश इस बार मार्च में ही फूलने लगा है, जबकि निचले क्षेत्रों में आम के पेड़ों पर समय से पहले बौर निकल आने से बागवानों में भी चिंता बढ़ गई है।मौसम के इस असामान्य बदलाव का सबसे अधिक असर जल स्रोतों पर पड़ रहा है। इससे गेहूं, जौ और अन्य फसलों के सूखने का खतरा भी मंडराने लगा है।दूसरी ओर जंगलों में आग की घटनाएं भी बढ़ने लगी हैं।

सूखी घास और पत्तियों के कारण जंगलों में जगह-जगह आग लगने से वातावरण में धुएं की चादर फैल गई है। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है बल्कि वन्यजीवों के लिए भी संकट खड़ा हो गया है।क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते अच्छी बारिश नहीं हुई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। पेयजल संकट, फसलों को नुकसान और जंगलों में आग जैसी समस्याएं और बढ़ सकती हैं। ऐसे में लोगों की निगाहें अब आसमान की ओर टिकी हैं और सभी को जल्द बारिश होने की उम्मीद है।

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